हरदीबाजार। एसईसीएल दीपका प्रबंधन की प्रस्तावित बसावट, नौकरी और मुआवजा प्रक्रिया को लेकर हरदीबाजार में रविवार को पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की महापंचायत आयोजित हुई। मंगलम भवन में दोपहर 3 बजे शुरू हुई बैठक शाम करीब 6 बजे तक चली।

महापंचायत में ग्रामीणों ने अपने अधिकारों और गांव के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर एकजुटता दिखाते हुए एसईसीएल प्रबंधन की नीतियों का विरोध किया।महापंचायत में सबसे प्रमुख मुद्दा जयंती नगर बसावट स्थल को लेकर रहा। ग्रामीणों का कहना है कि उतरदा के जयंती नगर में प्रस्तावित बसावट से हरदीबाजार का भविष्य सुरक्षित नहीं दिखाई देता। ग्रामीणों ने जयंती नगर बसावट को निरस्त कर सुपेत पारा बाईपास के पास उतरदा की करीब 1340 एकड़ वन भूमि को हरदीबाजार के लिए उपयुक्त बसावट स्थल के रूप में विकसित करने की मांग रखी।

प्रत्येक खाते में एक नौकरी की मांगग्रामीणों ने वर्ष 2004 से 2010 के दौरान हुए अधिग्रहण के समय लागू छत्तीसगढ़ पुनर्वास नीति का हवाला देते हुए प्रत्येक खाते में एक नौकरी देने की मांग की। उनका कहना है कि अधिग्रहण के दौरान लागू प्रावधानों के अनुरूप प्रभावित परिवारों को रोजगार का लाभ मिलना चाहिए।मुआवजा कटौती का विरोधमहापंचायत में एसईसीएल द्वारा परिसंपत्तियों के मूल्यांकन को लेकर भी नाराजगी जताई गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि ड्रोन सर्वे और मकानों को नया-पुराना बताकर 40, 60 और 100 प्रतिशत मुआवजा निर्धारित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने सभी मकानों का 100 प्रतिशत मुआवजा, सोलसियम सहित देने की मांग की।इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को स्थायी बसावट स्थल पर बनाने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र को किराए के भवन में संचालित करने के बजाय भविष्य की बसावट को ध्यान में रखते हुए स्थायी स्थान पर बनाया जाना चाहिए।

मुआवजा पत्रक और कटऑफ लिस्ट सार्वजनिक करने की मांगहरदीबाजार सरपंच लोकेश्वर कंवर ने कहा कि एसईसीएल दीपका प्रबंधन जब तक मुआवजा पत्रक और कटऑफ लिस्ट सार्वजनिक नहीं करता तथा सुपेत पारा को हरदीबाजार के लिए उचित बसावट स्थल के रूप में सुनिश्चित नहीं करता, तब तक ग्रामीण एसईसीएल की गतिविधियों में सहयोग नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपनी जायज मांगों को लेकर एकजुट हैं और जरूरत पड़ने पर संवैधानिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।नरेश टंडन ने जयंती नगर बसावट को निरस्त कर सुपेत पारा में बसावट विकसित करने की मांग की। उन्होंने मुआवजे में कटौती नहीं करने और सभी प्रभावितों को समान रूप से उचित मुआवजा देने की बात कही।उपसरपंच रेखा जायसवाल ने ग्रामीणों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि मांगों को पूरा कराने के लिए सभी को मिलकर एसईसीएल दीपका प्रबंधन के सामने अपनी बात रखनी होगी।

वहीं पूर्व जनपद सदस्य अनिल टंडन ने कहा कि हरदीबाजार एक महत्वपूर्ण कस्बा है, जहां व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ बस स्टैंड, थाना, तहसील, शिक्षण संस्थान सहित कई शासकीय और अशासकीय संस्थाएं संचालित हैं। ऐसे में भविष्य को ध्यान में रखते हुए बाईपास के किनारे स्थित सुपेत पारा को बसावट स्थल बनाया जाना चाहिए।

विधायक प्रतिनिधि दीपका क्षेत्र व्यास राठौर ने भी कहा कि बसावट, नौकरी और मुआवजे से जुड़ी मांगों पर एसईसीएल दीपका प्रबंधन गंभीरता से विचार नहीं करता है, तो ग्रामीणों को अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।महापंचायत में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण मौजूद रहे। बैठक में ग्रामीणों ने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन की चेतावनी देते हुए एकजुट होकर आगे की रणनीति बनाने पर सहमति जताई।

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