
बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के हेमूनगर स्थित ओम् शान्ति कॉटेज में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में “शिक्षक: मन-मस्तिष्क के मार्गदर्शक, एकीकृत विश्व के निर्माता” विषय पर शिक्षक सम्मान एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। शहर के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित पांच विद्यालयों के प्राचार्यों ने इसमें सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर संजय अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि महापौर पूजा विधानी रहीं।कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा और बड़ी जिम्मेदारी का कार्य है। शिक्षक जिस मेहनत और समर्पण के साथ बच्चों को शिक्षा देकर उनके भविष्य को दिशा देते हैं, उसका समाज निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जीवन में चाहे कितने ही बड़े पद पर पहुंच जाए, अपने शिक्षक के प्रति उसका सम्मान सदैव बना रहता है और अवसर मिलने पर वह श्रद्धापूर्वक उनके चरण स्पर्श करता है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ के सेवाकेंद्र को तपस्या का स्थान बताते हुए यहां के शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान उनकी सहजता, सादगी और शिक्षकगण के प्रति आत्मीय व्यवहार ने उपस्थितजनों को प्रभावित किया।महापौर पूजा विधानी ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी स्वयं की इच्छा भी शिक्षक बनने की थी, लेकिन परिस्थितिवश वे इस क्षेत्र में नहीं आ सकीं। उन्होंने कहा कि अब महापौर के रूप में समाज की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने शिक्षकगण के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके योगदान की सराहना की।हेमूनगर सेवाकेंद्र की संचालिका बीके लता दीदी ने कार्यक्रम के मुख्य विषय पर कहा कि शिक्षक कुम्हार और कलाकार की भांति बच्चों के व्यक्तित्व को गढ़ने का कार्य करता है। वह केवल मस्तिष्क को ज्ञान नहीं देता, बल्कि मन को श्रेष्ठ दिशा देकर संस्कार और चरित्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बी के उमा ने कहा कि आज की कक्षा में बैठा बच्चा ही कल के समाज का निर्माण करेगा। इसलिए शिक्षक जब बच्चों में शांति, प्रेम, सहयोग, सम्मान और स्वीकार्यता जैसे मूल्यों को विकसित करता है, तब वह वास्तव में एकीकृत विश्व के निर्माण की आधारशिला रखता है। उन्होंने परमात्मा को परम शिक्षक बताते हुए राजयोग के माध्यम से स्वयं के मन को शांत, सकारात्मक और सशक्त बनाने की प्रेरणा दी।रेलवे नंबर वन स्कूल से आए एक शिक्षक ने अपने विचार रखते हुए कहा कि “प्रलय और निर्माण दोनों शिक्षक की गोद में ही पलते हैं।” उन्होंने इस भाव के माध्यम से समाज के भविष्य निर्माण में शिक्षक की जिम्मेदारी को रेखांकित किया। उपस्थित प्राचार्यों ने भी कार्यक्रम को सार्थक एवं प्रेरणादायी बताते हुए इसकी सराहना की।कार्यक्रम में छोटे बच्चों ने स्वागत नृत्य के माध्यम से अतिथियों एवं शिक्षकगण का अभिनंदन किया। दीप प्रज्वलन के पश्चात वैशाली द्वारा शिव तांडव पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुति दी गई। शिक्षकों के लिए मूल्य आधारित गतिविधियां आयोजित की गईं तथा राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से आंतरिक शांति की अनुभूति कराई गई।इस अवसर पर कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं महापौर पूजा विधानी को शॉल, पौधा, प्रेरणादायी कोटेशन एवं प्रभु प्रसाद भेंट कर सम्मानित किया गया। सहभागी शिक्षक-शिक्षिकाओं को अभिनंदन पत्र एवं प्रभु-प्रसाद प्रदान कर उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। उपस्थित सभी शिक्षकों ने आयोजन की भूरी भूरी प्रशंसा किया। अंत में बीके उमा बहन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों, प्राचार्यों, शिक्षकगण तथा कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया और सभी को एक नई सकारात्मक शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।


