कोरबा/बिलासपुर एसईसीएल (SECL) की सबसे बड़ी परियोजनाओं, गेवरा और दीपका में श्रमिक राजनीति गरमा गई है। कोयला मजदूर सभा (एच.एम.एस.) के केंद्रीय नेतृत्व ने एक बेहद सख्त और अचानक फैसला लेते हुए अपनी कई क्षेत्रीय और शाखा कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इससे स्थानीय श्रमिक नेताओं में हड़कंप मच गया है।

इकोयला मजदूर सभा (HMS) के महासचिव नाथूलाल पांडेय द्वारा 21 जुलाई 2026 को जारी किए गए पत्र (संदर्भ क्र.: KMS/HMS/GS/JBP/86/2026) के अनुसार, यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

यह कदम यूनियन के संविधान के क्लॉज 23(b) के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उठाया गया है। पत्र की प्रतियां SECL के गेवरा एरिया, दीपका एरिया और CEWS गेवरा के महाप्रबंधकों सहित उप-क्षेत्रीय प्रबंधकों को सौंपी गई हैं।

यूनियन ने निम्नलिखित कमेटियों की मान्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है।क्षेत्रीय कमेटियां गेवरा एरिया, दीपका एरिया, और CEWS गेवरा। शाखा कमेटियां गेवरा प्रोजेक्ट, गेवरा एरिया यूनिट, दीपका प्रोजेक्ट, और दीपका एरिया यूनिट।

पुराने नेताओं से न करें कोई पत्राचार महासचिव नाथूलाल पांडेय ने SECL प्रबंधन को स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि भंग की गई कमेटियों के पूर्व पदाधिकारियों या सदस्यों के पास अब कोयला मजदूर सभा (HMS) का प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है।

प्रबंधन से साफ तौर पर अनुरोध किया गया है कि पूर्व पदाधिकारियों के साथ HMS के नाम पर कोई भी आधिकारिक पत्राचार, बैठक या परामर्श न किया जाए। जब तक नई कमेटियों का गठन नहीं हो जाता, तब तक यूनियन से जुड़े सभी पत्राचार सीधे महासचिव को ही संबोधित किए जाएं।

इस धमाकेदार फैसले ने गेवरा और दीपका कोयला खदानों की ट्रेड यूनियन राजनीति के समीकरण बदल दिए हैं। जिन नेताओं का वर्चस्व इन क्षेत्रों में था, उनके अधिकार एक झटके में शून्य कर दिए गए हैं। अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय नेतृत्व नई कमेटियों की कमान किन चेहरों को सौंपता है और इस फैसले के बाद पुराने गुटों की क्या प्रतिक्रिया होती है।

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