कोरबा/ अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर जहां देश-दुनिया में श्रमिकों के सम्मान की बातें हो रही थीं, वहीं कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र में मजदूरों को अपने हक के लिए सड़क पर उतरना पड़ा। नरईबोध के भू-स्थापित और भू-प्रभावित परिवारों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए एसईसीएल गेवरा प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई और अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी।

नरईबोध क्षेत्र के गुलाब सिंह, राजेंद्र प्रसाद पटेल, इंद्रा गोसाई, सुरेन्द्र सिंह कंवर, गोमती केवट सहित बड़ी संख्या में मजदूरों और प्रभावित परिवारों ने नारेबाजी करते हुए मुख्य महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन इतना उग्र था कि मजदूर दिवस का निर्धारित कार्यक्रम भी स्थगित करना पड़ा।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कोयला खदान विस्तार के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन: अब तक न तो स्थायी रोजगार दिया गया न ही पूर्ण मुआवजा मिला पीएनसी कंपनी में कार्यरत 13 भू-स्थापित मजदूरों को अचानक नौकरी से हटा दिया गया सभी भू-स्थापित एवं भू-प्रभावित परिवारों को तत्काल रोजगार हटाए गए 13 मजदूरों की पुनर्बहाली शेष 4 प्रभावित लोगों को नौकरी भूमि अधिग्रहण का पूरा मुआवजा बिना कटौती के भुगतान मजदूरों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 15 मई 2026 तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे: अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे गेवरा खदान का संचालन ठप करेंगे एसईसीएल मुख्यालय का घेराव करेंगे ।

ज्ञापन में मजदूरों ने कहा, “हमारी जमीन लेकर रोजगार और मुआवजे के वादे किए गए थे, लेकिन आज भी हम अपने हक के लिए भटक रहे हैं। मजदूर दिवस पर भी हमें सड़क पर उतरना पड़ रहा है, जो प्रबंधन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

इस आंदोलन को छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश संगठन मंत्री का भी समर्थन मिला, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर मजदूरों के साथ खड़े रहने की बात कही।भू-स्थापित मजदूरों और उनके परिवारों का कहना है कि जमीन जाने के बाद भी उन्हें न रोजगार मिला और न ही उचित मुआवजा। अब जो काम मिला था, वह भी छीना जा रहा है। यदि 15 मई तक समाधान नहीं निकला, तो गेवरा क्षेत्र में बड़े स्तर पर औद्योगिक अशांति और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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