कोरबा/ छत्तीसगढ़ी भाषा को जनगणना में शामिल करने और संविधान की 8वीं अनुसूची में स्थान दिलाने की मांग को लेकर कोरबा में व्यापक विरोध दर्ज किया गया।

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के संयुक्त बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर कलेक्टर को भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।संगठनों की मुख्य मांग है कि आगामी 2026-27 की जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि प्रदेश की अस्मिता और पहचान से जुड़ा विषय है।

ज्ञापन के दौरान पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्व-जनगणना पोर्टल में अन्य भाषाओं को स्थान दिया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ की प्रमुख भाषा छत्तीसगढ़ी को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने इसे प्रदेशवासियों की भावनाओं के साथ अन्याय बताया।

संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि जनगणना 2026-27 में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा। यहां तक कि जनगणना के बहिष्कार की भी चेतावनी दी गई है।

उन्होंने कहा कि यह अब केवल मांग नहीं, बल्कि “हमर भासा-हमर पहिचान” की लड़ाई बन चुकी है।

कार्यक्रम में सुरजीत सोनी और जैनेन्द्र कुर्रे सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान और अधिकार के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।ज्ञापन की प्रतिलिपि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है।

अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है, क्योंकि आने वाले समय में यह मुद्दा और भी व्यापक रूप ले सकता है।

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