कोरबा/गेवरा। एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शामिल SECL की गेवरा परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार ठेका कंपनी PNC Infratech Limited के खिलाफ स्थानीय बेरोजगारों और श्रमिकों का आक्रोश खुलकर सामने आया है।

जिला पंचायत सदस्य विनोद यादव और युवा पार्षद सुजीत सिंह की अगुवाई में स्थानीय युवाओं ने खदान परिसर पहुंचकर कंपनी का काम बंद करा दिया। इससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शन से पहले ही प्रबंधन को लिखित रूप से सूचना देकर कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। पत्र में आरोप लगाया गया कि कंपनी स्थानीय बेरोजगार युवाओं की अनदेखी कर बाहरी लोगों को रोजगार दे रही है, जिससे क्षेत्र में भारी नाराजगी है।

प्रदर्शनकारियों ने कंपनी में कार्यरत सभी ड्राइवरों, सुपरवाइजरों और मशीन हेल्पर्स की नाम-पता सहित सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही खदान से प्रभावित 5 किलोमीटर दायरे के गांवों के बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की मांग उठाई गई।

आरोप यह भी है कि खदान में कार्यरत ड्राइवरों को सरकार द्वारा निर्धारित HPC रेट का भुगतान नहीं किया जा रहा, जबकि अन्य कर्मचारियों से 12-12 घंटे काम लेकर उनका शोषण किया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि आवाज उठाने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है और दबाव बनाकर काम कराया जाता है। यहां तक कि मारपीट के आरोप भी लगाए गए हैं।

5 दिन का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद आज स्थानीय युवाओं ने बड़ा कदम उठाते हुए कंपनी का काम ठप करा दिया। इस दौरान प्रशासन की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों और प्रबंधन के अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई।

हालांकि प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए जल्द ही त्रिपक्षीय वार्ता कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस आश्वासन से मामला शांत होगा या आने वाले दिनों में गेवरा क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा? फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासन और SECL प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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