दीपका/कोरबा। छत्तीसगढ़ में गौवंश संरक्षण, संवर्धन एवं वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर “गौ सम्मान आह्वान अभियान” के तहत एक ज्ञापन राज्यपाल के नाम प्रेषित किया गया है।

यह ज्ञापन प्रशासनिक माध्यम से तहसीलदार/एसडीएम एवं जिला कलेक्टर के जरिए भेजा गया।ज्ञापन में कहा गया है कि गौवंश भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और परंपराओं का महत्वपूर्ण आधार रहा है। वर्तमान में गौवंश की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है, जिससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों पर भी असर पड़ रहा है।

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि स्वतंत्रता के समय प्रति व्यक्ति गौवंश की उपलब्धता अधिक थी, जो अब तेजी से घटती जा रही है। साथ ही, गौ-तस्करी, अवैध वध, सड़क दुर्घटनाओं एवं प्लास्टिक खाने जैसी समस्याओं के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में गौवंश की मौत हो रही है।

अभियान से जुड़े लोगों ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ में गौवंश संरक्षण के लिए कड़े कानून बनाए जाएं तथा केंद्र सरकार से समन्वय कर “केंद्रीय गौ सेवा एवं संरक्षण अधिनियम” लागू किया जाए। इसके अलावा गौवंश के संरक्षण और देखभाल के लिए अलग मंत्रालय के गठन की भी मांग की गई है।ज्ञापन के माध्यम से शासन-प्रशासन से शीघ्र ठोस कदम उठाने की अपील की गई है, ताकि गौवंश की रक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण व्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।

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