बिलासपुर/कोरबा।
कोरबा जिले के दीपका क्षेत्र में कोयला परिवहन से उड़ने वाली धूल और भारी वाहनों के आवागमन से आम लोगों के स्वास्थ्य एवं जनजीवन पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है।उमागोपाल द्वारा दायर पर 19 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्री चंद्रसेन चौहान ने पक्ष रखा।सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने SECL के प्रबंध निदेशक, बिलासपुर को नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शपथपत्र में यह बताया जाए कि जिस क्षेत्र में ओवरब्रिज का निर्माण चल रहा है, वहां कोयले की धूल के फैलाव को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों ने अब तक क्या-क्या ठोस कदम उठाए हैं।अदालत ने प्रभावित क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को भी गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा उठाए गए उपायों की जानकारी मांगी है। आदेश में विशेष रूप से भारी वाहनों के आवागमन और ट्रकों के माध्यम से कोयला परिवहन की स्थिति का उल्लेख किया गया है। मामला केवल धूल और सड़क की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन से जुड़ा सवाल है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब SECL प्रबंधन को अदालत के सामने यह बताना होगा कि प्रदूषण और कोयले की धूल को नियंत्रित करने के लिए जमीन पर वास्तव में क्या कदम उठाए गए हैं।

मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि SECL प्रबंधन अदालत के समक्ष क्या जवाब और क्या ठोस कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करता है।उल्लेखनीय है कि इस जनहित के मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना गैर राजनीतिक संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष उमागोपाल द्वारा हाईकोर्ट का रुख किया गया है। मामले में अधिवक्ता श्री चंद्रसेन चौहान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे हैं।

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