“बजट नहीं, विकास नहीं… आखिर दीपका नगर पालिका चला कैसे रही है काम?”

दीपका। नगर पालिका परिषद दीपका एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मुद्दा है नगर पालिका का वार्षिक बजट, जिसे लेकर कांग्रेस ने अध्यक्ष और परिषद की कार्यप्रणाली पर सीधा हमला बोला है। कांग्रेस नेता एवं पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी विशाल शुक्ला ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका अध्यक्ष को पद संभाले डेढ़ साल होने को है, लेकिन अब तक परिषद के समक्ष बजट पेश नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर नगर का विकास किस योजना और किस वित्तीय खाके के आधार पर किया जा रहा है?

बिना बजट कैसे तय हो रहे विकास के काम?

नगर पालिका अधिनियम के तहत हर वर्ष बजट बैठक आयोजित कर आय-व्यय का ब्यौरा और आगामी विकास कार्यों की रूपरेखा तय की जाती है। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि दीपका में यह पूरी प्रक्रिया ही ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।विशाल शुक्ला का कहना है कि जब परिषद के सामने बजट ही नहीं रखा गया तो पार्षदों को यह कैसे पता चलेगा कि नगर पालिका के पास कितनी राशि है, किन योजनाओं पर खर्च होना है और किन विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष मद की राशि भी डेढ़ साल से उपयोग नहीं की गई है। यदि यह आरोप सही है तो यह नगर पालिका की विकास योजनाओं और प्रशासनिक सक्रियता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। नगर में मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन उपलब्ध संसाधनों का उपयोग नहीं होना लोगों को हैरान कर रहा है।

कांग्रेस ने नगर पालिका पर पेयजल संकट को लेकर भी निशाना साधा है। आरोप है कि भीषण गर्मी के दौरान कई क्षेत्रों में लोगों को पानी की समस्या झेलनी पड़ी, लेकिन नगर पालिका कोई प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सकी।अब मानसून की दस्तक से पहले भी नालियों की सफाई, जल निकासी और मरम्मत कार्यों की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो पहली बारिश में ही सड़कों पर जलभराव और घरों में गंदा पानी घुसने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

सुशासन के दावों पर सवालदिलचस्प बात यह है कि हाल ही में नगर में सुशासन तिहार और विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यदि बजट तक पेश नहीं हुआ है तो विकास के दावों की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

नगरवासियों के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि नगर पालिका ने वास्तव में बजट प्रस्तुत नहीं किया है तो इसकी वजह क्या है? क्या परिषद की बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं? क्या विकास कार्यों की कोई स्पष्ट योजना नहीं है? और सबसे बड़ा सवाल—डेढ़ साल बाद भी नगर पालिका जनता के सामने अपना वित्तीय रोडमैप क्यों नहीं रख पाई?

कांग्रेस नेता विशाल शुक्ला ने मांग की है कि नगर पालिका परिषद तत्काल बजट बैठक बुलाए, आय-व्यय का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करे और नगर के विकास की स्पष्ट कार्ययोजना जनता तथा पार्षदों के सामने रखे।

डेढ़ साल बाद भी बजट क्यों नहीं पेश हुआ?अध्यक्ष मद की राशि का उपयोग क्यों नहीं किया गया?पेयजल संकट के दौरान क्या कदम उठाए गए?मानसून से पहले नालियों की सफाई और जल निकासी की तैयारी कितनी हुई?बिना बजट के विकास कार्यों की प्राथमिकता कैसे तय हो रही है?

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