गेवरा (कोरबा)।एसईसीएल गेवरा क्षेत्र स्थित वर्कर्स क्लब में बुकिंग के नाम पर लाखों रुपये के गबन का गंभीर मामला सामने आया है। विवाह, सामाजिक एवं अन्य आयोजनों की बुकिंग से प्राप्त राशि को वर्कर्स क्लब के आधिकारिक बैंक खाते में जमा नहीं किए जाने के आरोपों से क्लब प्रबंधन और ट्रेड यूनियनों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, वर्कर्स क्लब गेवरा का संचालन पांच मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है। वर्तमान में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से जुड़े वर्कर्स क्लब में सचिव के पद पर पदस्थ हैं और बीते दो वर्षों से क्लब के प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यभार को संभाल रहे हैं।

बुकिंग की राशि खाते में जमा नहीं होने का आरोप।

बताया जा रहा है कि क्लब में विभिन्न आयोजनों की बुकिंग से प्राप्त राशि को नियमित रूप से वर्कर्स क्लब के नाम से संचालित आधिकारिक बैंक खाते में जमा नहीं कराया गया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, यह राशि करीब 10 लाख रुपये तक हो सकती है। आरोप है कि यह रकम वर्षों से क्लब स्तर पर ही रखी गई।

राहुल सिंह के प्रबंधन को दिए पत्र से मामला और गंभीर

मामले में राहुल सिंह का नाम सामने आया है, जो वर्कर्स क्लब में पदस्थ बताए जाते हैं तथा एसईसीएल गेवरा के कर्मचारी हैं। इस संबंध में राहुल सिंह द्वारा एसईसीएल गेवरा प्रबंधन को लिखे गए पत्र में यह स्वीकार किया गया है कि उनके पास क्लब से संबंधित आय-व्यय की राशि सुरक्षित है तथा वे उक्त रकम को 25 जनवरी 2026 तक बैंक में जमा कर देंगे। पत्र में मानसिक व पारिवारिक कारणों का हवाला भी दिया गया है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि इस कथित गड़बड़ी पर पर्दा डालने के उद्देश्य से हाल ही में एक बैठक आयोजित की गई, ताकि मामला सार्वजनिक न हो और आंतरिक स्तर पर ही निपटाया जा सके। हालांकि, इस बैठक में क्या निर्णय लिया गया, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कुलदीप कुमार पिछले दो वर्षों से सचिव पद पर पदस्थ हैं, तो उनकी जानकारी के बिना इतनी बड़ी राशि का लेन-देन कैसे संभव हुआ ? और यदि उन्हें इसकी जानकारी थी, तो अब तक जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई ?

श्रमिक संगठनों और कर्मचारियों में यह चर्चा तेज है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी या फिर इसे दबाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं इस कथित गड़बड़ी में अन्य पदाधिकारी या नेता भी शामिल तो नहीं हैं।

फिलहाल यह मामला गेवरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें एसईसीएल गेवरा प्रबंधन, ट्रेड यूनियनों और श्रमिक संगठनों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते पारदर्शी जांच और सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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