दीपका। नगर पालिका परिषद दीपका की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर में स्ट्रीट लाइट मरम्मत के लिए करोड़ों के संसाधन होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि पालिका की खुद की दो-दो ‘फ्लाई स्काई’ मशीनें कबाड़ बन चुकी हैं और अब काम चलाने के लिए बाकीमोगरा नगर पालिका से मशीन मंगानी पड़ रही है।

सूत्रों के मुताबिक, दीपका नगर पालिका ने पिछले कार्यकाल में एक नई फ्लाई स्काई मशीन खरीदी थी, लेकिन खरीद के कुछ ही दिनों बाद वह खराब हो गई। हैरानी की बात यह है कि लाखों की यह मशीन लंबे समय से नगर पालिका परिसर में खड़ी-खड़ी “सफेद हाथी” बनी हुई है। वहीं दूसरी पुरानी मशीन भी अब पूरी तरह बंद पड़ी है। नतीजा यह है कि स्ट्रीट लाइट सुधार कार्य प्रभावित हो रहा है और नगरवासियों को अंधेरे का सामना करना पड़ रहा है।

स्ट्रीट लाइट घोटाले की जांच भी ठंडे बस्ते में?

पहले से ही दीपका में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। शिकायतों के बाद जांच टीम गठित की गई थी और सात दिनों में रिपोर्ट सौंपने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई। सूत्रों की मानें तो अब इस मामले की जांच पार्षदों, कर्मचारियों या विभागीय इंजीनियरों के बजाय विभाग के बड़े अधिकारी कर सकते हैं।

मेंटनेंस के लिए दूसरे पालिका के भरोसे दीपका।

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वार्डों में खराब स्ट्रीट लाइट सुधारने के लिए अब बाकीमोगरा नगर पालिका से फ्लाई स्काई मशीन बुलानी पड़ रही है। इससे साफ है कि नगर पालिका अपनी संपत्तियों के रखरखाव में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि: जब नगर पालिका के पास अपनी मशीनें हैं, तो वे खराब क्यों पड़ी हैं? मेंटेनेंस के लिए बजट कहां जा रहा है? लाखों की मशीनें कबाड़ बनने की जिम्मेदारी किसकी है? बड़ा सवाल नगरवासियों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे करने वाली दीपका नगर पालिका क्या सिर्फ कागजों में विकास कर रही है? या फिर लापरवाही और भ्रष्टाचार की वजह से जनता को बुनियादी सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!