कोरबा/गेवरा। SECL के गेवरा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए बड़ा सवाल उठाया है—“क्या हम सौतेले हैं?”।
कर्मचारियों ने महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर समान लाभांश (इंसेंटिव) देने की मांग की है।ज्ञापन में कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि गेवरा परियोजना के अंतर्गत कार्यरत विभिन्न सेक्शन—जैसे ईस्ट सेक्शन, डंपर, शॉवेल, डोजर ऑपरेटर, वर्कशॉप, सिविल, हॉस्पिटल, एरिया ऑफिस समेत अन्य विभागों के कर्मचारी उत्पादन में बराबर योगदान दे रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें कई वर्षों से न तो लाभांश मिल रहा है और न ही किसी प्रकार का इंसेंटिव।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि वे अपने-अपने कार्य—जैसे मशीनों की मरम्मत, पानी सप्लाई, शिफ्टिंग, सुरक्षा, चिकित्सा सेवाएं आदि—न करें, तो उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा। इसके बावजूद केवल एक सेक्शन को ही ओवरटाइम और इंसेंटिव देना अन्य कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कर्मचारियों को संडे और पीएचडी (पब्लिक हॉलिडे) जैसे बुनियादी लाभों से भी वंचित रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।कर्मचारियों ने मांग की है कि पूरे गेवरा क्षेत्र के सभी कर्मचारियों को समान रूप से इंसेंटिव राशि प्रदान की जाए और भेदभावपूर्ण व्यवस्था को समाप्त किया जाए। साथ ही उन्होंने प्रबंधन से इस विषय पर जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया है।
इस ज्ञापन की प्रतिलिपि कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया, बिलासपुर प्रबंधन सहित विभिन्न उच्च अधिकारियों और श्रमिक संगठनों को भी भेजी गई है।कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे कंपनी के उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं, लेकिन यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है।
यह मामला एक बार फिर कोयला उद्योग में कर्मचारियों के साथ हो रहे भेदभाव और असंतोष को उजागर करता है, जिस पर अब प्रबंधन की प्रतिक्रिया अहम होगी।

