कोरबा | गेवरा क्षेत्रSECL गेवरा परियोजना के कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। नेहरू शताब्दी चिकित्सालय गेवरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पर कर्मचारियों को प्रताड़ित करने, मनमानी करने और मेडिकल बिल भुगतान में अनियमितता बरतने के आरोप लगाए गए हैं।
कोयला मजदूर सभा सेक्रेटरी एससी मंसूरी की ओर से महाप्रबंधक, SECL गेवरा प्रोजेक्ट को भेजे गए लिखित पत्र में आरोप लगाया गया है कि CMO द्वारा तानाशाही रवैया अपनाते हुए कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।मेडिकल बिल समय पर पास नहीं किए जा रहे,दवाइयों पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाए जा रहे,कर्मचारियों को बार-बार कागजी कार्रवाई में उलझाया जा रहा है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नेहरू शताब्दी चिकित्सालय, जिसे केंद्रीय अस्पताल का दर्जा प्राप्त है, वर्तमान में केवल “रेफर सेंटर” बनकर रह गया है।डॉक्टरों, नर्सों और तकनीशियनों की भारी कमी की वजह से एक्स-रे और अन्य सुविधाओं का अभाव में मरीजों को बाहर इलाज के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।खदानों में कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारी गंभीर बीमारियों (टीबी, शुगर, एलर्जी आदि) से जूझ रहे हैं। अस्पताल में दवा न मिलने पर उन्हें बाहर से इलाज कराना पड़ता है, लेकिन जब बिल भुगतान की बारी आती है तो दवाइयों के रैपर और खाली पैकेट तक मांगे जाते हैं।इस प्रक्रिया से कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित और हतोत्साहित किया जा रहा है।
CMO पर मंसूरी ने यह भी आरोप है कि वे अपने चहेते कर्मचारियों को विशेष सुविधा दे रहे हैं, जबकि अन्य कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है, जिससे आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मंसूरी ने प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर समस्या का समाधान करने का अल्टीमेटम दिया है।यदि तय समय में कार्रवाई नहीं होती है, तो अस्पताल के सामने धरना-प्रदर्शन और भूख हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
अब सवाल यह है कि क्या SECL प्रबंधन कर्मचारियों की सेहत से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम उठाएगा या फिर मामला आंदोलन की राह पकड़ेगा?अब निगाहें प्रबंधन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

