शाजी थामस
कोरबा, गैर-राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने आज जिला कोरबा में कलेक्टर के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति महोदय को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने दो गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
पहला मुद्दा ,एसईसीएल कुसमुंडा में 70 लाख टन कोयले की हेराफेरी का घोटाला, जिसकी अनुमानित राशि 2100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ज्ञापन की प्रति सीबीआई को भी भेजी गई है। संगठन ने चेतावनी दी कि इस बड़े घोटाले को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांक इस मामले में secl जनसंपर्क अधिकारी सनिश चंद्र ने बयान जारी कर समाचारों को अफवाह कहा है।
दूसरा मुद्दा ,बलरामपुर जिले में अफीम की अवैध खेती का। संगठन ने इसकी कड़ी निंदा की और तुरंत जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।ज्ञापन सौंपने के दौरान छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के प्रदेश संगठन मंत्री उमागोपाल कहां आज हम छत्तीसगढ़ की माटी और संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट हैं।
एसईसीएल कुसमुंडा में 2100 करोड़ का कोयला घोटाला हो रहा है, हमारे खनिज लूटे जा रहे हैं। बलरामपुर में अफीम की खेती हमारे समाज और युवाओं को बर्बाद कर रही है। हम गैर-राजनीतिक हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के हितों की लड़ाई में कोई पीछे नहीं हटेगा।
राष्ट्रपति महोदय से मांग है कि CBI जांच हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो हमारा आंदोलन और तेज होगा। छत्तीसगढ़ महतारी के नाम पर, हम लड़ेंगे और जीतेंगे ।
इसके बाद जिला संयोजक अतुल दास महंत ने अपना वक्तब दिया आज हम यहां छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान की रक्षा के लिए खड़े हैं। 70 लाख टन कोयले की हेराफेरी से छत्तीसगढ़ की संपत्ति लुट रही है, और अफीम की खेती से हमारी आने वाली पीढ़ी खतरे में है। हम छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के सेनानी हैं, और यह घोटाला बर्दाश्त नहीं होगा।
सरकार को चेतावनी है तुरंत जांच शुरू हो, दोषी सजा पाएं। अन्यथा हम बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। छत्तीसगढ़ के हित में हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
प्रमुख रूप से मौजूद प्रदेश संगठन मंत्री उमागोपाल जिला संयोजक अतुल दास महंतजिला अध्यक्ष ,एलएक्स टोप्पो जिला सचिव विनोद सारथी बसंत महंत, जिला सह सचिव राजेश साहू जिला संगठन मंत्री , जिला मीडिया प्रभारी कन्हैया सुंदर, भू-स्थापित अशोक पटेल खड़ प्रभारी गोविंद सारथीकलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया जिसमें संगठन के सैकड़ों सेनानी मौजूद रहे।
संगठन ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के हितों की रक्षा के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा। यदि आवश्यक हुआ तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

