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कोरबा। एसईसीएल की दीपका और गेवरा खदानों से उड़ रही धूल के कारण आसपास के क्षेत्रों के निवासी गंभीर परेशानी का सामना कर रहे हैं।

खासकर प्रगति नगर और दीपका कॉलोनी के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं, क्योंकि ये बस्तियां खदानों के मुहाने के पास स्थित हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि खदानों से उठने वाली धूल के कारण सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं और वातावरण प्रदूषित हो रहा है।

लोगों का आरोप है कि धूल नियंत्रण के लिए खदान प्रबंधन द्वारा डस्ट सप्रेशन के नाम पर करोड़ों रुपये का ठेका दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर कहीं नजर नहीं आ रहा है।सूत्रों के मुताबिक यह ठेका केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह गया है।

उड़ती धूल को रोकने के लिए सड़कों और खदान क्षेत्रों में पानी का छिड़काव बेहद नगण्य बताया जा रहा है। परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र में दिनभर धूल का गुबार छाया रहता है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ कर्मचारियों और उनके परिवारों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

वहीं स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि क्षेत्र में कई श्रमिक ट्रेड यूनियन होने के बावजूद इस गंभीर समस्या को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। लोगों का कहना है कि यूनियन नेताओं को मजदूरों और क्षेत्र की जनता की समस्याओं के बजाय प्रबंधन से मिलने वाले लाभ की ज्यादा चिंता है।

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि खदानों में धूल नियंत्रण की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए और डस्ट सप्रेशन के नाम पर दिए गए ठेकों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो सके और लोगों को प्रदूषण से राहत मिल सके।

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