कोरबा/नई दिल्ली।देशभर के विभिन्न श्रमिक संगठनों के आह्वान पर आज आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर कई राज्यों में आंशिक रूप से देखने को मिला।
हड़ताल के समर्थन में केंद्रीय श्रमिक संगठनों एवं कर्मचारी संगठनों ने भागीदारी की। इसके चलते सार्वजनिक सेवाओं और औद्योगिक गतिविधियों पर मिला-जुला प्रभाव रहा।
श्रमिक संगठनों ने श्रम कानूनों में संशोधन, महंगाई, ठेका प्रथा, निजीकरण और न्यूनतम वेतन जैसे मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया।
संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि मांगों पर उचित पहल नहीं होने के कारण उन्हें हड़ताल का सहारा लेना पड़ा।
कोरबा जिले में भी विभिन्न संगठनों ने रैली एवं प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ तथा पुलिस बल की मौजूदगी में कानून-व्यवस्था बनाए रखी गई।
इधर, एसईसीएल (SECL) के पीआरओ सानिश चन्द्र ने अपने आधिकारिक बयान में बताया कि कुल 20 खदानों में से 11 ओपन कास्ट खदानें सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं, जबकि 9 खदानों में आंशिक असर देखा गया है। कोरबा जिले की दीपका खदान को सामान्य रूप से संचालित बताया गया है, वहीं गेवरा क्षेत्र में आंशिक प्रभाव की जानकारी दी गई। प्रथम पाली एवं जनरल पाली में कार्य जारी रहने की बात भी कही गई है।
वहीं श्रमिक संगठनों का दावा है कि पूरे एसईसीएल क्षेत्र में लगभग 87 प्रतिशत कर्मचारियों ने हड़ताल का समर्थन किया है।प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और आवश्यक सेवाएं संचालित हैं।

