विनोद उपाध्याय

दीपका (कोरबा)।एसईसीएल की दीपका कोयला खदान में सुआ–भोड़ी फेस पर हुई ब्लास्टिंग ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यहां इंसानी जान की कोई कीमत नहीं रह गई है।

ग्राम रेकी निवासी लखन पटेल की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन प्रबंधन अब भी चुप्पी साधे बैठा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ब्लास्टिंग से पहले न तो सेफ्टी ज़ोन बनाया गया और न ही आसपास मौजूद लोगों को हटाया गया। इतना ही नहीं सड़क पर गुजर रहे लोग इस ब्लास्टिंग के चपेट में आ गए।

उत्पादन का दबाव इतना ज्यादा था कि नियमों को रौंदते हुए खुलेआम अमानक ब्लास्टिंग करा दी गई। नतीजा – एक निर्दोष ग्रामीण की जान चली गई।

किसके आदेश पर हुई ब्लास्टिंग ? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह जानलेवा ब्लास्टिंग किस अफसर के इशारे पर कराई गई? क्या बिना सुरक्षा ऑडिट और अनुमति के ब्लास्टिंग कराना अब दीपका प्रबंधन की नई नीति बन चुकी है?

पहले भी हो चुकी हैं चेतावनियाँ ग्रामीणों का कहना है कि दीपका खदान में पहले भी कई बार लापरवाही की शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार प्रबंधन ने फाइलों में मामले को दबा दिया। “उत्पादन लक्ष्य” के नाम पर मजदूरों और ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ लगातार जारी है।

मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर धरना

हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीण मृतक लखन पटेल के परिवार को उचित मुआवजा और आश्रित को नौकरी देने की मांग को लेकर घटनास्थल पर धरने पर बैठ गए हैं।

ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक प्रबंधन ठोस घोषणा नहीं करेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

क्या यह मौत भी आंकड़ों में गुम हो जाएगी?दीपका खदान में यह पहली घटना नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई होगी, या फिर एक और मौत को “दुर्घटना” बताकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?

अब पूरे कोरबा जिले की निगाहें इस पर टिकी हैं कि एसईसीएल और कोल इंडिया प्रबंधन इस हादसे को कितनी गंभीरता से लेता है – या फिर दीपका खदान में लापरवाही का यह खूनी खेल यूं ही चलता रहेगा।

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